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शास्त्रीय भारतीय संगीत
सुराग
यह वाद्य यंत्र 18वीं शताब्दी में लखनऊ घराने में विकसित हुआ और इसकी विशेषता तारों को धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक झनझनाना है तथा प्रत्येक नोट की गूंज पर जोर देना है।
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यह वाद्य यंत्र 18वीं शताब्दी में लखनऊ घराने में विकसित हुआ और इसकी विशेषता तारों को धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक झनझनाना है तथा प्रत्येक नोट की गूंज पर जोर देना है।